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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
जैसलमेर–बाड़मेर क्षेत्र के कालबेलिया समाज का सांस्कृतिक-नृवंशविज्ञान अध्ययन: परंपराएँ, जीवनशैली और लोककला
Authors
आसुराम
Abstract
यह शोध-पत्र राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र, विशेषकर जैसलमेर–बाड़मेर में निवास करने वाले कालबेलिया समाज के सांस्कृतिक एवं नृवंशविज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है। कालबेलिया समुदाय भारत की समृद्ध लोकसंस्कृति का एक विशिष्ट अंग है, जो अपनी अनूठी जीवनशैली, परंपराओं, लोकनृत्य एवं संगीत के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध है। प्रस्तुत अध्ययन में इस समुदाय के सामाजिक संगठन, आर्थिक संरचना, सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं, लोककला एवं जीवनशैली का समग्र विश्लेषण किया गया है। ऐतिहासिक दृष्टि से कालबेलिया समाज एक घुमंतू समुदाय रहा है, जिसकी आजीविका पारंपरिक रूप से सांप पकड़ने तथा उससे संबंधित ज्ञान पर आधारित रही है। “काल” अर्थात् सांप और “बेलिया” अर्थात् मित्र—इस प्रकार यह समुदाय सांपों के साथ अपने विशिष्ट संबंध के लिए जाना जाता था। किन्तु वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लागू होने के पश्चात् इनके पारंपरिक व्यवसाय पर प्रतिबंध लग गया, जिससे इनके जीवन में व्यापक परिवर्तन आया। इस परिस्थिति में इस समुदाय ने अपनी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों विशेषकर कालबेलिया नृत्य एवं लोकसंगीत को आजीविका का प्रमुख साधन बना लिया। प्रस्तुत शोध में कालबेलिया समाज की सामाजिक संरचना का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि यह समाज पारंपरिक मूल्यों, जातीय संरचना तथा सामुदायिक एकता पर आधारित है, जहाँ परिवार एवं जातीय पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साथ ही, महिलाओं की भूमिका इस समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में। अध्ययन में यह भी पाया गया है कि कालबेलिया समाज की सांस्कृतिक परंपराएँ—जैसे विवाह संस्कार, लोकगीत, कथाएँ एवं त्योहार—आज भी जीवंत रूप में विद्यमान हैं और मौखिक परंपरा के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी संचरित हो रही हैं। इनके लोकनृत्य की विशेषता इसकी लचकदार शारीरिक मुद्राएँ एवं सांप की चाल का अनुकरण है, जिसने इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।आर्थिक दृष्टि से यह समाज आज भी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। पारंपरिक व्यवसाय के समाप्त होने के बाद यह समुदाय पर्यटन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर निर्भर हो गया है, जिससे आय में अस्थिरता बनी रहती है। इसके अतिरिक्त शिक्षा का निम्न स्तर, सामाजिक भेदभाव एवं सांस्कृतिक पहचान के क्षरण की समस्या भी इस समाज के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ हैं। आधुनिकता एवं वैश्वीकरण के प्रभाव के कारण कालबेलिया समाज की जीवनशैली में परिवर्तन आ रहा है, किन्तु इसके साथ ही उनकी पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान पर भी प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में इस शोध में यह प्रतिपादित किया गया है कि इस समुदाय की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु सरकारी एवं गैर-सरकारी स्तर पर समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।अतः यह अध्ययन न केवल कालबेलिया समाज की सांस्कृतिक एवं नृवंशविज्ञानिक विशेषताओं को उजागर करता है, बल्कि उनके समक्ष उपस्थित चुनौतियों एवं संभावनाओं का भी सम्यक् विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जो भविष्य में इस क्षेत्र में किए जाने वाले शोधों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
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Pages:23-27
How to cite this article:
आसुराम "जैसलमेर–बाड़मेर क्षेत्र के कालबेलिया समाज का सांस्कृतिक-नृवंशविज्ञान अध्ययन: परंपराएँ, जीवनशैली और लोककला". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 23-27
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