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International Journal of
Social Science and Humanities
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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
मशरूम उत्पादन व्यवसाय भी हो सकता है आजीविका का साधन: भारतीय परिप्रेक्ष्य
Authors
मधुलिका कुमारी
Abstract
मशरूम उत्पादन एक लाभकारी उद्योग है जिसमें ज्यादातर छोटे कृषक आते हैं। अपवाद के तौर पर कुछ ही औद्योगिक इकाई है जो अत्याधिक तकनीकी और नियंत्रित वातावरण सुविधायुक्त है। छोटे कृषक ज्यादातर मौसमी उत्पादन पर निर्भर होते हैं और वे शीत ऋतु में कम मूल्य के उत्पादन सुविधा का उपयोग कर मशरूम उगाते हैं और मशरूम के वार्षिक उत्पादन में लाभकार सहयोग प्रदान करते हैं। मौसमी छोटे कृषक शीत ऋतु के प्राकृतिक कम तापमान का फायदा उठाकर एक या दो फसल का उत्पादन कर लेते हैं। वे भारत के मशरूम उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान ही नहीं देते बल्कि जलवायु का लाभ उठाकर उत्तम पोषण स्रोत भी उपलब्ध कराते हैं। मशरूम की खेती को कम मूल्य की संरचना का उपयोग कर बढ़ाया जा सकता है जिसमें कृषि अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग कर एक वर्ष में 8-10 महीने मशरूम की खेती की जा सकती है जो कि स्थानीय जलवायु के अनुरूप होती है।
मशरूम आज संसार में यदि 15 बिलियन डालर के बराबर भोजन के रूप में प्रयोग हो रहे हैं तो 3 बिलियन डालर के बराबर औषधि के रूप में। पूर्वी एशिया (कोरिया, चीन, जापान, थाईलैंड) की औपधि पद्धतियों में खुम्बों का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। रिशी मशरूम सबसे महत्वपूर्ण औषधीय खुम्ब है और औषधीय खुम्बों के व्यापार का 70 प्रतिशत भाग रिशी मशरूम का है। ये जानकारियाँ यदि उपभोक्ता तक पहुँचाई जाती हैं तो खुम्ब न खाने वाला इसे खाना शुरू कर देगा और जो खा रहा है वह खुम्ब उपभोग की मात्रा तथा बारम्बारता बढ़ाएगा, जिससे किसानों की खुम्ब की बिक्री को समस्या का समाधान ही नहीं होगा, बल्कि उसे उचित मूल्य भी मिलेगा।
आज का शिक्षित व्यक्ति अपने भोजन के प्रति अधिक जागरूक एवं सतर्क है। भोजन में पाये जानेवाले पौष्टिक तत्वों की जानकारी प्रत्येक शिक्षित उपभोक्ता चाहता है जिसका उस विशेष भोज्य पदार्थ की माँग तथा मूल्य पर विशेष प्रभाव पडता है। खुम्ब हमारे देश के लिये एक नवीन खाद्य पदार्थ है जिसे यदि भोजन के रूप में प्रचलित तथा प्रोत्साहित करना है तो इसके विशिष्ट पौष्टिक एवं औषधीय गुणों को प्रचारित करना होगा। यहाँ पर यह भी उल्लेख करना उचित होगा कि विकसित देशों की तुलना में प्रति व्यक्ति खुम्ब की खपत भारत में बहुत कम है जैसे जर्मनी के 3 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष की तुलना में भारत में मात्र 30 ग्राम खपत होती है। खुम्ब उत्पादकों के हित में होगा कि वे इसके गुणों के बारे में उचित माध्यम एवं तरीके से लोगों को अवगत कराये ताकि खुम्ब की खपत बढ़े और किसानों को विपणन की समस्या का समाधान हो सके।

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Pages:175-179
How to cite this article:
मधुलिका कुमारी "मशरूम उत्पादन व्यवसाय भी हो सकता है आजीविका का साधन: भारतीय परिप्रेक्ष्य". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 175-179
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