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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
भारतीय षड्दर्शनों की वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में प्रासंगिकता का अध्ययन
Authors
मीना खत्री, डॉ. मृदुला शर्मा
Abstract
प्रस्तुत शोध का उद्देश्य भारतीय षड्दर्शनों -सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा एवं वेदांत की वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में प्रासंगिकता का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना था। आधुनिक शिक्षा प्रणाली तकनीकी दक्षता, प्रतिस्पर्धा एवं सूचना विस्तार पर अधिक केंद्रित होती जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप मानसिक संतुलन, नैतिक मूल्य, मानवीय संवेदनशीलता तथा आत्मबोध जैसे पक्ष अपेक्षाकृत उपेक्षित हो रहे हैं। इस अध्ययन में भारतीय षड्दर्शनों के प्रमुख दार्शनिक सिद्धांतों का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि ये दर्शन आधुनिक शिक्षा की अनेक चुनौतियों के समाधान हेतु सार्थक दृष्टि प्रदान करते हैं। अध्ययन से ज्ञात हुआ कि सांख्य दर्शन आधुनिक मनोवैज्ञानिक शिक्षा में व्यक्तित्व विकास, भावनात्मक बुद्धिमत्ता एवं आत्म-जागरूकता का सुदृढ़ आधार प्रस्तुत करता है, जबकि योग दर्शन मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता एवं आत्मसंयम के विकास में अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होता है। न्याय दर्शन आलोचनात्मक चिंतन, विश्लेषणात्मक तर्क क्षमता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने में सहायक है, वहीं वैशेषिक दर्शन विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए निरीक्षण और तर्क पर आधारित पद्धति को सुदृढ़ करता है। मीमांसा दर्शन शिक्षा को नैतिकता, कर्तव्यबोध एवं चरित्र निर्माण से जोड़ता है, जबकि वेदांत दर्शन समग्र, मूल्यपरक एवं मानवतावादी शिक्षा की अवधारणा को सुदृढ़ करता है। निष्कर्षतः भारतीय षड्दर्शन आधुनिक शिक्षा को केवल कौशल-आधारित या रोजगारोन्मुख न रखकर उसे संतुलित, मानवीय, मूल्यपरक एवं जीवनोन्मुख बनाने की क्षमता रखते हैं। अतः वर्तमान शैक्षिक सुधारों के संदर्भ में भारतीय षड्दर्शनों की दार्शनिक दृष्टि अत्यंत प्रासंगिक एवं मार्गदर्शक सिद्ध होती है।
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Pages:4-6
How to cite this article:
मीना खत्री, डॉ. मृदुला शर्मा "भारतीय षड्दर्शनों की वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में प्रासंगिकता का अध्ययन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 4-6
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