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VOL. 7, ISSUE 6 (2025)
बहुराष्ट्रीय निगमों में सामाजिक उत्तरदायित्व संबंधी गतिविधियों के संदर्भ में गांधीवादी श्रम-न्यासिता की समकालीन प्रासंगिकता
Authors
Dr. Sujit Kumar
Abstract
वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में बहुराष्ट्रीय निगम (Multinational Corporations–MNCs) विश्व-अर्थव्यवस्था के प्रमुख संचालक बन चुके हैं। उत्पादन, पूँजी, श्रम और प्रौद्योगिकी पर इनके व्यापक नियंत्रण ने सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility–CSR) को एक महत्त्वपूर्ण वैश्विक विमर्श बना दिया है। इस संदर्भ में महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित न्यासिता सिद्धांत, विशेषतः श्रम-न्यासिता, एक वैकल्पिक नैतिक ढाँचा प्रस्तुत करता है, जो लाभ-केन्द्रित कॉर्पोरेट संस्कृति को मानव-केन्द्रित बनाने की क्षमता रखता है।
यह शोध-पत्र बहुराष्ट्रीय निगमों की CSR गतिविधियों का विश्लेषण गांधीवादी श्रम-न्यासिता के आलोक में करता है और यह मूल्यांकन करता है कि क्या यह दृष्टिकोण आज के वैश्विक पूँजीवादी ढाँचे में प्रासंगिक, व्यवहार्य और सामाजिक न्यायोन्मुख हो सकता है। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि श्रम-न्यासिता CSR को दान-आधारित गतिविधि से आगे ले जाकर नैतिक दायित्व और संरचनात्मक न्याय के रूप में पुनर्परिभाषित करती है।
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Pages:117-119
How to cite this article:
Dr. Sujit Kumar "बहुराष्ट्रीय निगमों में सामाजिक उत्तरदायित्व संबंधी गतिविधियों के संदर्भ में गांधीवादी श्रम-न्यासिता की समकालीन प्रासंगिकता". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 7, Issue 6, 2025, Pages 117-119
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