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VOL. 6, ISSUE 3 (2024)
गर्भवती महिलाओं के पोषण सम्बन्धी जागरूकता का अध्ययन
Authors
पूजा तिवारी, शिखा खरे
Abstract
‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है’ यह कहावत सत्य है अतः मानसिक स्वास्थ्य के अभाव में जीवन अधूरा है । पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, अध्यात्मिक एवं चारित्रिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है। इसी प्रकार गर्भावस्था में गर्भिणों के मानसिक स्वास्थ्य को सन्तुलित बनाए रखना अनिवार्य है। माता के विचारों का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर अत्यधिक पड़ता है गर्भवती स्त्री को मानसिक उद्वेगों, भय, चिन्ता, शोक, क्रोध, तनाव आदि से बचना चाहिए। कभी-कभी गर्भावस्था कुछ गम्भीर समस्याओं से घिर जाती है ,रक्ताल्पता इनमें सबसे आम है और उपचार की दृष्टि से आसान भी। प्रसव पूर्व अच्छी देखभाल से तात्पर्य है कि कोई ऐसी मुश्किल आये तो उसका समय से निदान और यथोचित उपचार किया जाए।
गर्भावस्था में आहार एवं पोषण का अमूल्य योगदान होता है। क्योंकि स्वस्थ शिशु को जन्म देने के लिए माता का स्वस्थ रहना आवश्यक होता है। संतुलित आहार के सेवन से स्वास्थ्य उत्तम रहता है। साथ ही गर्भस्थ शिशु का शारीरिक एवं मानसिक विकास उत्तम प्रकार से होता है। संतुलित व पोषण आहार ही माँ व बच्चे की ठीक से रचना कर पाता है। अतः गर्भवती माँ को अधिक कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन ‘ए’, ‘सी’, ‘डी’ की अत्यधिक आवश्यकता होती है।गर्भावस्था के दौरान वसा की कोई अतिरिक्त आवश्यकता नहीं होती हैं किन्तु अणीय अंगो जैसे यकृत तथा मस्तिष्क में अनिवार्य वसीय अम्लों की प्रचुर मात्रा रहती है। संतुलित आहार से ही उसकी आवश्यकता पूरी हो जाती है।
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Pages:45-47
How to cite this article:
पूजा तिवारी, शिखा खरे "गर्भवती महिलाओं के पोषण सम्बन्धी जागरूकता का अध्ययन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 6, Issue 3, 2024, Pages 45-47
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