ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 1 (2021)
पूर्वी उत्तर प्रदेश (भारत) में सिंचाई एवं जल संसाधनः एक भौगोलिक विश्लेषण
Authors
Dr. Rajesh Yadav
Abstract
पूर्वी उत्तर प्रदेश में नहरों, नलकूपों, कुओं, एवं तालाबों से सिंचाई होती है। इस क्षेत्र में सिंचाई के साधन एवं इसके स्रोत के अन्तर्गत नहरों की लम्बाई, राजकीय नलकूपों की संख्या, निजी नलकूपों एवं पम्पसेटों की संख्या, पक्के कुओं की संख्या आदि का वर्णन किया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में विभिन्न साधनों द्वारा वास्तविक सिंचित क्षेत्रफल के अन्तर्गत नहरों, राजकीय नलकूपों, निजी नलकूपों, कुओं एवं तालाबों के साथ ही अन्य साधनों का भी तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इस क्षेत्र में जलसंसाधन का उपयोग सिंचाई, उद्योग, घरेलू कार्यों, नौपरिवहन एवं नौकाविहार, नहरें, एवं जलविद्युत आदि कार्यों में किया जाता है। प्रस्तुत अध्ययन में पूर्वी उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी अंतर बेसिन जलांतरण परियोजना जिसमें कोसी-घाघरा लिंक, गण्डक-गंगा लिंक, घाघरा-यमुना लिंक एवं चुनार-सोन बैराज लिंक आदि का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अन्तर्गत बाढ़ जल के उपयोग की भी चर्चा की गई है। प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश में सिंचाई साधनों, वास्तविक सिंचित क्षेत्रफल के साथ ही जलसंसाधन एवं उसके उपयोग का विश्लेषण करना है। यह अध्ययन प्राथमिक एवं द्वितीयक आंकड़ों पर आधारित है। सिंचाई साधनों की संख्या एवं वास्तविक सिंचित क्षेत्रफल से सम्बन्धित आंकड़ों को वर्ष 2000 एवं वर्ष 2019 के अद्यतन आंकड़ों को जिला सांख्यिकी पत्रिका से प्राप्त किया गया है। साथ ही जलसंसाधन से सम्बन्धित आंकड़ों को उत्तर प्रदेश की सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग की वेबसाइट से प्राप्त किया गया है। इस अध्ययन में पिछले 20 वर्षों के आंकड़ों में परिवर्तन के विश्लेषण पर जोर दिया गया है और पाया गया है कि अध्ययन क्षेत्र में सिंचाई का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यह क्षेत्र एक कृषि प्रधान क्षेत्र है तथा यहां की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। इसलिए सिंचाई की सुविधाओं को और दुरूस्त करने की आवश्यकता है। विश्लेषण में यह पाया गया है कि नहरों एवं राजकीय नलकूपों की संख्या में वृद्धि होने के बावजूद भी इनसे सिंचित क्षेत्रफल में कमी आई है। दूसरी ओर निजी नलकूपों एवं पम्पसेटों की संख्या में वृद्धि यह दर्शाता है कि अध्ययन क्षेत्र में इनसे सिंचाई का प्रचलन काफी बढ़ा है। इस प्रकार स्पष्ट है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपार जलसंसाधन है जिसका सदुपयोग करके यहां के निवासियों एवं इस क्षेत्र में विकास की गंगा को बहाया जा सकता है।
Download
Pages:43-49
How to cite this article:
Dr. Rajesh Yadav "पूर्वी उत्तर प्रदेश (भारत) में सिंचाई एवं जल संसाधनः एक भौगोलिक विश्लेषण ". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 3, Issue 1, 2021, Pages 43-49
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

