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International Journal of
Social Science and Humanities
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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
'अथर्वा' में इतिहास और कल्पना का समन्वय
Authors
फरहीन , प्रभा पन्त
Abstract
 इतिहास और कल्पना का समन्वय साहित्य को सजीवता प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता रहा है। हिन्दी साहित्य में आदिकाल से अद्यतन काल तक इतिहास और कल्पना का समन्वय कर अनेक ग्रंथों की रचना होती रही; लगभग प्रत्येक विधा में इस प्रकार की रचनाएँ उपलब्ध हैं। हिन्दी साहित्य में इस प्रकार की रचनाओं को ‘ऐतिहासिक रचना’ की श्रेणी में रखा जाता है। कवि आनंद कुमार सिंह द्वारा रचित ‘अथर्वा’ इसी प्रकार की साहित्यिक रचना है, जिसमें इतिहास से पात्रों और घटनाओं को लेकर काव्य का ताना-बाना बुना गया है। ‘अथर्वा’ में कवि ने शनिलोक के सबसे बड़े चन्द्रमा ‘टाइटन’ पर जीवन और प्रलय की परिकल्पना की है। ‘टाइटन’ पर प्रलय के पश्चात् ऋषि अथर्वा द्वारा समस्त ज्ञान-विज्ञान को बचाकर पृथ्वी पर लाया जाता है, जो भारत की षोड्शी विद्या के रूप में प्रख्यात होती है। सहस्त्रों वर्ष पश्चात् भारत की इसी विद्या से विदेशी आकर्षित होते हैं, और इसे खोजने भारत आते हैं। इन विदेशी यात्रियों में फ़ाह्यान, ह्वेनसांग, अल-बिरूनी, इब्नबतूता, मार्कोपोलो इत्यादि प्रमुख थे। ‘अथर्वा’ में इन यात्रियों की भारत यात्रा और यहाँ रहकर खोजपूर्ण अध्ययन करने की घटनाओं को इतिहास और कल्पना के समन्वय से साहित्यिक रूप दिया गया है।  
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Pages:77-80
How to cite this article:
फरहीन , प्रभा पन्त "'अथर्वा' में इतिहास और कल्पना का समन्वय ". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 77-80

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