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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
भारत में वस्तु एवं सेवाकर का प्रभाव एवं चुनौतिया
Authors
डॉ. जिया लाल राठौऱ
Abstract
जीएसटी या वस्तु एवं सेवाकर, आजादी के बाद भारत में सबसे बड़ा कर सुधार है जो लंबे समय से लंबित था। जीएसटी का उद्देश्य कई करों के स्थान पर एक एकीकृत कर लगाकर भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल बनाना है। जीएसटी एक मात्र अप्रत्यक्ष कर है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को सीधे जोड़ता है और इस प्रकार एक एकीकृत बाजार का निर्माण करके देश की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देता है। अब तक दुनिया के 160 से अधिक देशों ने जीएसटी लागू किया है, उसके बाद फ्रांस का स्थान है। भारत में जीएसटी का विचार 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रस्तावित किया था और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्तमंत्री असीम दास गुप्ता के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया था। इसे 1 अप्रैल 2010 से यूपीए सरकार के तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में लागू किया जाना था, लेकिन राजनीतिक मुद्दों और विभिन्न हित धारकों के परस्पर विरोधी हितों के कारण यह लागू नहीं हो सका। मई 2016 में जीएसटी के लिए संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा द्वारा पारित किया गया हालाँकि, इसके कार्यान्वयन के विरुद्ध भारी विरोध हो रहा है। यह आलेख जीएसटी अवधारणा, उसके लाभों का अवलोकन प्रस्तुत करता है और इसकी विशेषताओं के साथ-साथ इसके कार्यान्वयन में भारत के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी प्रकाश डालता है।
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Pages:1-3
How to cite this article:
डॉ. जिया लाल राठौऱ "भारत में वस्तु एवं सेवाकर का प्रभाव एवं चुनौतिया". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 1-3
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