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International Journal of
Social Science and Humanities
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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
हिन्दी साहित्य में स्त्री और प्रकृति का अर्न्तसम्बन्ध: एक इको-फेमिनिस्ट अध्ययन
Authors
डॉ. निधि उप्रेती
Abstract
वर्तमान समय में पर्यावरणीय संकट और लैंगिक असमानता वैष्विक स्तर पर गंभीर चिंताओं के विषय हैं। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन, जैव-विविधता का क्षरण तथा सामाजिक-सांस्कृतिक विषमताएँ मानव सभ्यता के समक्ष अनेक चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रही हैं। ऐसी स्थिति में इको-फेमिनिज्म एक महत्वपूर्ण वैचारिक दृष्टिकोण के रूप में उभरता है, जो स्त्री और प्रकृति के मध्य अन्तर्सम्बन्धों को समझने का प्रयास करता है। इको-फेमिनिस्ट चिंतन यह प्रतिपादित करता है कि स्त्री और प्रकृति दोनों के शोषण का मूल कारण पितृसत्तात्मक एवं प्रभुत्ववादी सत्ता-संरचनाएँ हैं। हिन्दी साहित्य में प्रकृति और स्त्री दोनों को संवेदना, सृजन, करुणा तथा जीवन-संरक्षण के प्रतीकों के रूप में चित्रित किया गया है।
प्रस्तुत शोध-पत्र में हिन्दी साहित्य में स्त्री और प्रकृति के अन्तर्सम्बन्धों का इको-फेमिनिस्ट दृष्टि से अध्ययन किया गया है। विशेष रूप से महादेवी वर्मा, मैत्रेयी पुष्पा तथा चित्रा मुद्गल के साहित्य के साथ-साथ उत्तराखण्डी लोकसाहित्य और चिपको आन्दोलन का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य में स्त्री और प्रकृति का सम्बन्ध केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक तथा पारिस्थितिक यथार्थ से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह शोध पर्यावरणीय न्याय तथा लैंगिक समानता के बीच अन्तर्सम्बन्धों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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Pages:247-249
How to cite this article:
डॉ. निधि उप्रेती "हिन्दी साहित्य में स्त्री और प्रकृति का अर्न्तसम्बन्ध: एक इको-फेमिनिस्ट अध्ययन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 247-249
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