Logo
International Journal of
Social Science and Humanities
ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
हिन्दी के प्रमुख कहानीकारों की कहानियों में चित्रित बाल-मनोविज्ञान
Authors
डॉ. सीमा सिंह
Abstract
आधुनिक हिन्दी गद्य साहित्य, विशेष रूप से कहानियों में बच्चे, बचपन और बाल-मनोविज्ञान प्रारम्भ से ही विद्यमान रहा है। बचपन, मानव के जीवन में सीदे, सरल और प्यारे समय का द्योतक है। इसका प्रभाव हर पल, अलग-अलग रूपों में जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर दिखाई देता भी है। बचपन लाड़-प्यार का पर्याय भी होता है, माता-पिता का अपने बच्चों के प्रति प्रेम, बचपन में हर समय लड़ते-झगड़ते दिखने वाले भाई-बहनों का आपसी प्रेम और लगाव, गुरु का अपने छोटे शिष्यों के प्रति प्रेमभाव और बड़ों का घर के छोटे बच्चों के प्रति दुलार, जीवन को रसमय और आनंद से भर देता है। हिन्दी साहित्य में जीवन के इस काल को विषय स्थान और प्रमुखता प्राप्त हुई है। बालक, बचपन, बालमन विषय पर हिन्दी साहित्य में लेखन की एक पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है। आरम्भ में बच्चों को मनोरंजन के साथ नैतिकता का पाठ सीखाने के लिए पंचतंत्र, हितोपदेष और विक्रम-बेताल आदि कहानियों ने भारतीय घरों में विशेष जगह बनाई है। इसके बाद भक्तिकालीन कवियों ने अपने ईश्वर के बालरूप का चित्रण बड़े मनोवेग से किया है। आधुनिक कथाकारों ने बालकों का चित्रण भर न करके, उसे उसके मन के साथ समझते हुए, समाज में उसको प्रतिष्ठित करने का काम किया है। प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, जैनेन्द्र, और यशपाल आदि कथाकारों ने बहुत यथार्थवादी दृष्टिकोण के साथ अपनी रचनाओं में बालमन का चित्रण किया है।
Download
Pages:231-233
How to cite this article:
डॉ. सीमा सिंह "हिन्दी के प्रमुख कहानीकारों की कहानियों में चित्रित बाल-मनोविज्ञान". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 231-233
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.