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International Journal of
Social Science and Humanities
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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
पतञ्जलि योगसूत्र एवं आधुनिक योग एक समिक्षात्मक अध्ययन
Authors
ममता
Abstract
पतञ्जलि योगसूत्र और आधुनिक योग दोनों ही मानव जीवन के लिए उपयोगी हैं, अपितु उनका दृष्टिकोण अलग-अलग है। महर्षि पतञ्जलि के योग का उद्देश्य आत्मज्ञान (स्वयं को जानना) और मोक्ष प्राप्त करना है, अपितु आधुनिक योग का उद्देश्य स्वास्थ्य और फिटनेस पर केन्द्रित है। आज के समय में आधुनिक योग अधिक प्रचलित है, अपितु यदि इसमें पतञ्जलि के सिद्धान्तों को जोड़ा जाए तो यह और भी प्रभावी बन सकता है। महर्षि पतञ्जलि ने योगसूत्र में योग के आठ अगों को प्रमख माना है, जो इस प्रकार हैं- (1) यम, (2) नियम, (3) आसन, (4) प्राणायाम, (5) प्रत्याहार (6) धारणा (7) ध्यान (8) समाधि इत्यादि। इन नियमों को साधना का आधार माना गया है, जो व्यक्ति को नैतिक मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नŸिा की ओर अग्रसर करते हैं। महर्षि पतञ्जलि के योगसूत्र (योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः) के अनुसार चित्त की वृŸिायों का निरोध कर मन को शान्त और स्थिर करना जिसका मूल उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की प्राप्ति है, वहीं आधुनिक योग व्यावहारिक जीवन में स्वास्थ्य एवं मानसिक सन्तुलन स्थापित करने का प्रभावी साधन बन गया है, अपितु आधुनिक योग के बढ़ते व्यावसायीकरण के कारण इसके मूल स्वरुप में परिवर्तन की प्रवृŸिा भी देखी जा रही है। अतः इस प्रकार दोनो ही योग अपने-अपने सन्दर्भ में महत्वपूर्ण हैं। अपितु योग के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए इन दोनों के बीच सन्तुलन स्थापित करना आवश्यक है।
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Pages:42-44
How to cite this article:
ममता "पतञ्जलि योगसूत्र एवं आधुनिक योग एक समिक्षात्मक अध्ययन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 42-44
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