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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
भारत के प्रवासी उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन
Authors
दीपक नाथ, डॉ. हेमा
Abstract
उत्तराखण्ड में प्रवासियों (माइग्रेशन) का एक अध्ययन, पर्वतीय क्षेत्रों मे रोजगार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए हो रहे पलायन को दर्शाता है, जिसके कारण गाँव 'भूतिया' ( Ghost Villages) बन रहे यह पलायन कृषि संकट और बुनियादी ढांचे की कमी से प्रेरित हैं।, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और संस्कृति को गम्भीर चुनौती दे रहा है विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण खेती-बाड़ी (कृषि) में नुकसान, रोजगार के अवसरों की कमी, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, और सड़क बिजली व पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी। पलायन के मुख्य कारण हैं। पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग तेजी से मैदानों (जैसे- देहरादून, हल्द्वानी ) या उत्तराखण्ड से बाहर जा रहे हैं। जिससे हजारों गांव खाली या अर्ध-खाली हो गए हैं, जिन्हें भूतिया गाँव (Ghost Villagers) भी कहा जाने लगा है। खेती योग्य भूमि बंजर हो रही है है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। पुरुषों के पलायन के कारण महिलाओं पर कृषि और घरेलू कार्यों का अत्यधिक बोझ बढ़ गया हैं। पारंपरिक संस्कृति और त्योहारों के लिए भी लोग कम हो रहे हैं। PIB, भारत सरकार के अनुसार " वोकल फोर लोकल" के तहत स्थानीय उत्पादो को बढ़ावा देने, पर्यटन, और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं (सडक, स्वास्थ्य) को सुधारनें की तत्काल आवश्यकता है, ताकि लोग अपने गांवो में रुके। कृषि आधारित उद्योग, पशुपालन और ऊन उद्योग में कास-ब्रीडिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उत्तराखण्ड में पलायन एक सतत समस्या है, लेकिन सही स्थानीय विकास नीतियों और बुनियादी ढाँचे के विकास से इस पर लगाम लगाई जा सकती है ।
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Pages:19-22
How to cite this article:
दीपक नाथ, डॉ. हेमा "भारत के प्रवासी उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 19-22
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