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International Journal of
Social Science and Humanities
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VOL. 7, ISSUE 5 (2025)
मध्यकालीन निर्गुण संत दादू जी के दार्शनिक व धार्मिक सिद्धांतों का अध्ययन
Authors
ओम प्रकाश
Abstract
कबीर के शिष्यों की उत्तरवर्ती पीढी में सबसे प्रसिद्ध संत दादू दयाल थे। अहमदाबाद में जन्मे दादू का अधिकांश समय राजपूताना में ही व्यतीत हुआ। दादू के संदेश में दया, नमता एवं क्षमा स्पष्टतः दृष्टिगोचर होती है। दादू का संदेश हिन्दूधर्म या इस्लाम के धर्मिक पूर्वाग्रहों से सर्वथा मुक्त है। उन्होंने सभी धर्मों की आधारभूत एकता एवं भाईचारे पर बल दिया। अपने महान् गुरु कबीर की भांति दादू भी हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे और ईश्वर, धर्म, कर्मकाण्ड एवं धार्मिक औपचारिकताओं, मूर्तिपूजा, जातियों महन्तों-पंडों, अवतारवाद, तीर्थयात्रा आदि के बारे में भी उनके विचार कबीर के जैसे ही थे। उन्होंने जो पंथ चलाया, वह श्दादूपंथश् के नाम से प्रसिद्ध है। उनकी मृत्यु के बाद उनके शिष्यों-गरीबदास एवं माधोदास ने उनके उपदेशों का प्रचार-प्रसार का महती प्रयास किया।
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Pages:87-89
How to cite this article:
ओम प्रकाश "मध्यकालीन निर्गुण संत दादू जी के दार्शनिक व धार्मिक सिद्धांतों का अध्ययन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 7, Issue 5, 2025, Pages 87-89
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