Logo
International Journal of
Social Science and Humanities
ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 1 (2025)
प्राचीन भारत में इतिहास लेखन की समीक्षा
Authors
भरत कुमार
Abstract
विश्व के प्रत्येक देश में लोगों को इतिहास की समझ एक समय पर नहीं हुयी है बल्कि इसका ज्ञान अलग-अलग समय पर हुआ है। किसी भी देश का अपना कुछ न कुछ इतिहास होता है जिसके विषय में सुचनाएँ हमें समकालीन मनीषियों के द्वारा लिखे गये साहित्यों में से होती है किन्तु इस प्रकार के साहित्य में कौन सी सामाग्री इतिहास लेखन में सहायक सिद्ध होगी इसका निर्धारण कर पाना कठिन कार्य है। इतिहास लेख या इतिहासिकी का शाब्दिक अर्थ इतिहास लेखन की कला है। दुनिया के विभिन्न जन समुदायों और विभिन्न कालों में अतीत का जिज्ञासु बोध यानी ऐतिहासिक बोध एक समान मौजूद नहीं रहा है। प्राचीन यूनान एवं रोम तथा यहूदी एवं इसाई धर्माे ने युरोप से शक्तिशाली इतिहास बोध विरासत में लिया है किन्तु प्राचीन भारत में इतिहास बोध को देखा जाये तो इस सम्बन्ध में विद्वानो में काफी मतभेद है। विद्वानों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि प्राचीन भारत में भारतीयों को इतिहास लेखन की समझ नहीं थी। इस प्रकार की सोच रखने वाले विद्वानों में विन्टर निट्ज मैक्समूलर आदि का नाम उल्लेखनीय हैं। इस मान्यता के विपरीत विद्वानों का एक वर्ग यथा, डा. गोविन्द चन्द्र पाण्डेय, डा विश्वम्भर शरण पाठक, नीलकंठ शास्त्री आदि ने अपनी कृतियों के माध्यम से प्रमाणित करने का प्रयास किया कि भारतीय इतिहास लेखन की कला से परिचित थे।
Download
Pages:29-31
How to cite this article:
भरत कुमार "प्राचीन भारत में इतिहास लेखन की समीक्षा". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 7, Issue 1, 2025, Pages 29-31
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.