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VOL. 7, ISSUE 1 (2025)
16वीं-17वीं शताब्दी में नारी शिक्षाः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
राकेश कुमार
Abstract
किसी भी सभ्यता या संस्कृति की आत्मा को समझने तथा उसकी उपलब्धियों एवं श्रेष्ठता का मूल्यांकन करने का सर्वोपरी आधार उस काल की स्त्रियों के दषा का अध्ययन करना हैं। स्त्रियों की दषा किसी भी सभ्यता या संस्कृति का मापदंड माना जा सकता है। हाँलाकि भारत में स्त्रियों का इतिहास अत्यन्त गतिषील रहा है। इस लेख के माध्यम से 16वीं-17वीं शताब्दी मेंस्त्रियों की सामाजिक व साहित्यिक क्षेत्र में निभाई गई भूमिका को परखने की चेष्टा की गई है। मुगल बादषाहों द्वारा महिलाओं के प्रति उनका आचरण, व्यवहार, आदर, सम्मान एवं सहानुभूति की समीक्षा करने का प्रयास किया गया है। वस्त्र, उद्योग, कृषि, व्यापार एवं वाणिज्य, वित्तीय प्रबंधन एवं संचालन में महिलाओं की भूमिका के योगदान का तथ्यों के आधार पर आँका गया है। इस लेख द्वारा पर्दे के पीछे ही सही मायने पर महिलाओं द्वारा नारीवाद की ‘लौ‘ को जलाने की प्रयास की निर्णायक रखा गया है।
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Pages:26-28
How to cite this article:
राकेश कुमार "16वीं-17वीं शताब्दी में नारी शिक्षाः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 7, Issue 1, 2025, Pages 26-28
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