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VOL. 5, ISSUE 4 (2023)
साझा वन प्रबंध में पारिस्थितिकी विकास समिति एवं आदिवासियों की सहभागिता (राजस्थान के सीतामाता अभ्यारण के विशेष सन्दर्भ में)
Authors
जमना कुमारी राव, नेहा पालीवाल
Abstract
साझा वन प्रबंध नीति पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय वन नीति 1988 के परिप्रेक्ष्य में आरम्भ की गई एक ऐसी योजना है जिसमें वनों का संरक्षण एवं विकास कार्य वनों के समीप रहने वाले ग्रामवासियों के सहयोग से सम्पूर्ण साझेदारी के साथ किया जाता है। इसमें अभ्यारण क्षेत्र में लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पारिस्थितिकी विकास समिति गठित की जाती है। इस शोध पत्र में सीतामाता अभ्यारण में साझा वन प्रबंध में पारिस्थितिकी विकास समिति की स्थिति, कार्य एवं आदिवासियों की इसमें सहभागिता का अध्ययन प्राथमिक आँकड़ों की सहायता से किया गया है जिसके लिए साझा वन प्रबंध के अंतर्गत कार्यरत 250 आदिवासी श्रमिकों का प्रतिदर्श गैर-आनुपातिक स्तरित यादृच्छिक प्रतिचयन विधि द्वारा चयनित किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि सीतामाता अभ्यारण में साझा वन प्रबंध के अंतर्गत पारिस्थितिकी विकास समिति के बारे लगभग 94 प्रतिशत स्थानीय लोग जागरूक है, वहीँ लगभग 65 प्रतिशत लोग समिति की बैठक में भाग लेते हैं किन्तु हमेशा या अक्सर भाग लेने वाले मात्र 22 प्रतिशत आदिवासी ही हैं। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की भागीदारी अधिक रहती है किन्तु क्षेत्र एवं आयु के अनुसार उनकी सहभागिता में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया है।
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Pages:33-37
How to cite this article:
जमना कुमारी राव, नेहा पालीवाल "साझा वन प्रबंध में पारिस्थितिकी विकास समिति एवं आदिवासियों की सहभागिता (राजस्थान के सीतामाता अभ्यारण के विशेष सन्दर्भ में)". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 5, Issue 4, 2023, Pages 33-37
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