Logo
International Journal of
Social Science and Humanities
ARCHIVES
VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
भारत में संपोषित विकास की चुनौतियांः एक विवेचन
Authors
डॉ. पुष्पा देवांगन, डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन
Abstract
भारत जैसे विकासशील राष्ट्र ने अपने स्थायी/संपोषित विकास हेतु अनेक चुनौतियों एवं मुद्दों को अपनी कार्य योजनाओं, नीतियों एवं कार्यक्रमों में शामिल किया है। परन्तु स्थायी एवं संपोषित विकास हेतु वर्तमान विकास योजनाओं में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति तो हो ही वरन भविष्य की पीढ़ी की आवश्यकताओं के लिए भी पर्याप्त साधन एवं संसाधन उपलब्ध हो सके। साथ ही आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति, ऊर्जा, खाद्यान्न सुरक्षा, जल आदि के उपभोग में प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता, वन्य, पारिस्थिकीय तंत्र आदि को क्षति न पहुंचे और न ही इनका क्षरण हो। साथ ही इनके संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्राथमिक एवं मुख्य मुद्दों के रूप में शामिल किये जाए। पारम्परिक ऊर्जा के संसाधनों के दोहन की अपेक्षा गैर पारम्परिक अथवा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग एवं उपभोग पर जोर दिया जाना आवश्यक है।
Download
Pages:34-36
How to cite this article:
डॉ. पुष्पा देवांगन, डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन "भारत में संपोषित विकास की चुनौतियांः एक विवेचन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 34-36
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.