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International Journal of
Social Science and Humanities
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VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
उत्तर प्रदेश का दलित आन्दोलन पृथक्करण का आन्दोलन न होकर, सर्वसमावेशन का आन्दोलन रहा है
Authors
रंजीत कुमार
Abstract
वर्तमान में भारत देश के आधुनिक लोकतन्त्र में दलित आन्दोलन का उदय बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध से माना जा सकता है। यह शताब्दी दलित राजनीति के लिये प्रभात की किरण लेकर आयी थी। आधुनिक लोकतान्त्रिक भारत के पिता विश्वरत्न बाबासाहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर ने दलित आन्दोलन की नीव रखी। विश्वरत्न बाबासाहेब ने उन करोड़ो दबे कुचले लोंगो को जिन्हें समाज से बहिष्कृत कर दिया गया था, समाज में समानता का अधिकार दिलाया और उनके जीवन में खुशी की लहर का संचार किया। यही वह प्रथम दौर है जहाँ से दलित राजनीति का उदय हुआ। विश्वरत्न बाबासाहेब ने जिन करोड़ों दलितों को रास्ते पर चलने का भी अधिकार न था, उन्हें सभी अधिकारों को दिलाया और उनके समस्त बन्धनों को काटकर भारतीय राजनीति का अभिन्न अंग बना दिया। और करोड़ों दलितों को मानवाधिकार दिला दिया। बाबासाहेब के समय दलित राजनीति संगठित अवस्था में थी। विश्वरत्न बाबासाहेब के महापरिनिर्वाण के पश्चात दलित राजनीति ने एक नवीन मोड़ लिया। सम्पूर्ण भारत वर्ष के सभी राज्यों में अनेक पार्टियों को गठन हुआ। जिसमें दलित राजनीति पार्टियाँ भी सम्मिलित थी। जिन दलित राजनीतिक पार्टियों का गठन हुआ उनमें उत्तर प्रदेश में माननीय कांशीराम साहेब ने बहुजन समाज पार्टी का गठन करके दलित राजनति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसका प्रमुख कारण था माननीय कांशीराम साहेब का विश्वरत्न बाबासाहेब के विचारों, आदेशों एवं लक्ष्यां को ध्यान में रखकर चलना। महाराष्ट्र में रामदास अठावले ने रिपब्लिकन पार्टी, बिहार में रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी तथा दक्षिण में एक दो दलित पार्टी आदि अनेक अन्य पार्टियों का गठन तो हुआ परन्तु उनका लक्ष्य विश्वरत्न बाबासाहेब के आदेशो के विपरीत ही दृष्टिगोचर हेता है। उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में सबसे अधिक पहल मान्यवर कांशीराम साहेब एवं बहन कुमारी मायावती ने की । इन दोनों ने ही विश्वरत्न बाबासाहेब के आदेशों को ध्यान में रखकर कार्य किया। बहुजन दलित समाज के सामाजिक, राजनीतिक आर्थिक, शैक्षिण, धार्मिक आदि विकास को सामने रखते हुए कार्य किया। जिस प्रकार विश्वरत्न बाबासाहेब ने बहुजन दलितों के हितों को ध्यान में रखकर कानून के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, वही काम माननीय बहन कुमारी मायावती ने राज्य सभा में दलित शोषित समाज की सदन के सम्मुख बात न रखने देने के कारण इस्तीफा दे दिया था। वर्तमान में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय बहन कुमारी मायावती को छोड़कर अन्य सभी दलित पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुछ तो कांग्रेस मे मिल गये और कुछ भाजपा में मिल गये । इन नेताओं के भाजपा आदि में चले जाने से दलित राजनीति धरासायी हो गयी है। विश्वरत्न बाबासाहेब ने एक समय कहा था कि हे मेरे दलित वीरों तुम गलती से भी कांग्रेस का चार आने का सदस्य मत बनना परन्तु आज तो कांग्रेस और भाजपा में जाने की होड़ लगी हुई है।
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Pages:97-100
How to cite this article:
रंजीत कुमार "उत्तर प्रदेश का दलित आन्दोलन पृथक्करण का आन्दोलन न होकर, सर्वसमावेशन का आन्दोलन रहा है". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 97-100
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