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International Journal of
Social Science and Humanities
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VOL. 3, ISSUE 1 (2021)
न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में उसकी भूमिका: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
Dr. Kan Raj Pooniya
Abstract
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में न्यायपालिका की स्वतंत्रता एक मूलभूत सिद्धांत है, जो कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता की अवधारणा तथा लोकतंत्र में उसकी भूमिका का विश्लेषण करना है। न्यायपालिका को कार्यपालिका और विधायिका से स्वतंत्र रखा गया है, ताकि वह निष्पक्ष और निर्भीक रूप से न्याय प्रदान कर सके। इसकी स्वतंत्रता संवैधानिक प्रावधानों, न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया, कार्यकाल की सुरक्षा और वेतन संरचना जैसे तत्वों द्वारा सुनिश्चित की जाती है।
लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संविधान की व्याख्या करती है, मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है और राज्य की शक्तियों पर नियंत्रण स्थापित करती है। न्यायिक पुनरावलोकन Judicial Review और न्यायिक सक्रियता Judicial Activism के माध्यम से न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों को सुदृढ़ करती है और शासन में संतुलन बनाए रखती है। अतः न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की स्थिरता और प्रभावशीलता के लिए अनिवार्य है। हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया, न्यायिक जवाबदेही और लंबित मामलों जैसी चुनौतियाँ इसकी कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं।

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Pages:78-81
How to cite this article:
Dr. Kan Raj Pooniya "न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में उसकी भूमिका: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 3, Issue 1, 2021, Pages 78-81
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